सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग पर CAA और NRC को लेकर किये गए धरने सख्त लहजे में जवाब दिया है कि शाहीन बाग़ पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा सार्वजानिक जगहों पर धरना मान्य नहीं हैं और आगे से सार्वजानिक स्थान पर किये गए धरना प्रदर्शन बर्दाश्त नहीं होंगे.

कोर्ट के अहम् फैंसले से उन लोगो को करार जवाब मिला है जिन्होंने धरने के नाम पर सार्वजानिक जगहों को घेर कर आम जन जीवन को परेशानी में डाल दिया था. आवागमन एक आम आदमी का अधिकार है जिसे आप ऐसे छीन नहीं सकते.

कोर्ट के कथनानुसार लोगो को धरने का अधिकार है मगर इसके लिए किसी सार्वजानिक स्थान और सडको पर अनिश्चित काल को घेरने की की बजाय निर्धारित स्थलों पर ही अपनी मांग मनवाने के प्रयत्न करने चाहिए. ऐसे केस में प्रशाषन को यह अधिकार है कि वो अपने स्तर पर कार्यवाही करे.

इसके लिए प्रशाशन को किसी तरह के सार्वजानिक स्थान को खाली करवाने के लिए अलग से परमिशन लेने कि कोई आवश्यकता नहीं है. जैसा कि हमने देखा शाहीन बाग पर धरने प्रदर्शन के नाम पर 100 से भी ज्यादा दिनों के लिए इस जगह को इस्तेमाल करके रास्ता बंद कर दिया गया था.

जिसमे केंद्रीय सरकार को घेरने के लिए तमाम वामपंथी दल एक साथ नजर आये थे और इनके तार बाद में दिल्ली दंगो से भी जुड़े थे. अभी हाल ही में शाहीन बाग की दादी को टाइम्स पत्रिका में 100 सबसे प्रभावशील व्यक्तियों की लिस्ट में जगह मिली थी.

शाहीन बाग में जहा एक छात्र नेता जिसने असम को भारत से अलग करने की बात कह कर सनसनी फैला दी, उसका नाम शर्जील इमाम है. सरकार ने उसे गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था. शाहीन बाग़ में ऐसे कई आपतिजनक हरकते भी हुई जो सभ्य समाज को शोभा नहीं देती.

यहाँ पर वोट बेंक के नाम पर लोगो को भड़काया गया और अनुचित मांगे मनवाने के लिए महिलाओ और बच्चो का भरपूर इस्तेमाल किया गया. इस फैसले से जुडी प्रतिक्रियाये जल्दी ही आने की उम्मीद है. और इसे लोकतंत्र की दुहाई और सुप्रीम कोर्ट को केंद्र सरकार के प्रभुत्व में काम करने को लेकर बेवजह के सवाल उठाये जाने की प्रबल संभावना है.

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